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ghazal lyrics

Nazaara hai jo aankhon mein ghazal lyrics

नज़ारा है जो आँखों में ये हर सू टूट सकता है
मेरी साँसों पे है मेरा जो काबू टूट सकता है!

मेरे मौला मेरे बच्चों को तू जल्दी बड़ा कर दे
ये मिट्टी का बना है मेरा बाज़ू टूट सकता है!

मुसलमाँ खुद फसा है ये नज़र बन्दी के दल दल में
ये बिस्मिल्लाह जो पढ़ ले तो जादू टूट सकता है!

हमी मीज़ान करते हैं ग़रीबी और अमीरी का
हो गर ईमान की दौलत तराज़ू टूट सकता है!

चलो दिल साफ कर लो तुम गिला हम भी मिटा डालें
अगर हम साथ निकलेंगे तो करफू टूट सकता है!

यहाँ तनहा किसी का भी गुज़ारा हो नहीं सकता
कभी मैं टूट सकता हूँ कभी तू टूट सकता है!

सियासत जो तवायफ की तरह हमको नचाती है
अगर हम ऐक हो जायें तो घुँघरू टूट सकता है!

!! मोहम्मद अमीन फैज़ाबादी!!

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