Hindi Ghazal Abhav bhul gaye

Hindi Ghazal Abhav bhul gaye

अभाव भूल गये, मस्तियाँ याद हैं रेत पर बसाई वो बस्तियां याद हैं गरीबी में भी खूब महका. बचपन माँ बाप की सरपरस्तियाँ याद हैं चोर-सिपाही, गिल्ली-डंडा आहा कागजी नावें औ' कश्तियाँ याद हैं फटे. कपड़ों में स्कूल जाते. सुनी पड़ोसियों की वो फब्तियां याद हैं आज तेरी एक. हैसियत है 'मधु' गुरुओं की सब सख्तियाँ याद हैं इस ग़ज़ल के लेखक है डॉ. मधुसूदन चौबेRead more …